Wednesday, November 5, 2008

यदि किसी रोती बच्ची kओ आप हंसाने की कोशिश में है

तो ध्यान रखिये

आप पर उसे फुसलाने का आरोप लग सकता है

इन दिनों दिल से हसना जुर्म है

तो किसी को अपनी हँसी में शामिल करना

सबसे बड़ी जालसाजी

सावधान हो जाइये

क्योंकि इस समय

सबसे बड़ा अपराध है

आपका अपराधी न होना

शायद कोई चमत्कार हो जाय
बाती और मट्टी के बीच बिना तेल के बन जाय आग का रिश्ता
फिर तेल बना रहे विवादों में
आलू प्याज दाल दलहन
सबकी किल्लत हो जाय
पर चकमक के पत्थर के दिनों की याद में
बहती नदियों और हरे पेडो की याद में जल उठे उम्मीद का दिया
शायद हो जाय इस्सा

Tuesday, November 4, 2008

इक और दिन दुलक गया आँख से

अब आँखे

सपने नही दिन गिना करती है

संदेह

मै विश्वास करू

ठोकर खाऊ

हार जाऊ इससे बेह्तेर है

मै करू संदेह

संदेह

Tuesday, October 21, 2008

फीर शुरू हो गई स्वप्न्यात्रा कहते हुए
सपनो का कुछ सच नही होता
सपनो में कुछ सच नही होता